दैनिक अग्निहोत्र भजन, दैनिक हवन प्रार्थना, हिंदी भजन,दैनिक अग्निहोत्र भजन PDF
यज्ञरूप/पूजनीय प्रभो ! हमारे भाव उज्ज्वल कीजिए ।
छोड़ देवें छल-कपट को मानसिक बल दीजिए ॥
वेद की बोलें ऋचाएँ सत्य को धारण करें ।
हर्ष में हों मग्न सारे शोक-सागर से तरें ॥
अश्वमेधादिक रचाएँ यज्ञ पर-उपकार को ।
धर्म-मर्यादा चलाकर लाभ दें संसार को ॥
नित्य श्रद्धा-भक्ति से यज्ञादि हम करते रहें ।
रोग-पीड़ित विश्व के सन्ताप सब हरते रहें ॥
भावना मिट जाए मन से पाप-अत्याचार की ।
कामनाएँ पूर्ण होवें यज्ञ से नर-नारि की ॥
लाभकारी हों हवन हर प्राणधारी के लिए ।
वायु जल सर्वत्र हों शुभ गन्ध को धारण किये ॥
स्वार्थ-भाव मिटे हमारा प्रेमपथ विस्तार हो ।
‘इदन्न मम’ का सार्थक प्रत्येक में व्यवहार हो ॥
हाथ जोड़ झुकाए मस्तक वन्दना हम कर रहे ।
‘नाथ’ करुणारूप करुणा आपकी सबपर रहे ॥
– पं० लोकनाथ तर्कवाचस्पति (1875-1957)
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